ओडिशाराजस्थान

लोकोत्सव में साकार हो रही भारत की विविधता भरी संस्कृति

उदयपुर 31 जनवरी : गोवा के पणजी में आयोजित दस दिवसीय लोक कला महोत्सव ‘लोकोत्सव 2023 में भारत की विविधता भरी संस्कृति का संगम है।

पणजी स्थित दरीया संगम कला अकादमी संकुल में गोवा सरकार और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर द्वारा आयोजित इस कला महोत्सव ‘लोकोत्सव का उद्घाटन राजस्थान के राज्यपाल कालराज मिश्र ने सोमवार को किया था।

लोकोत्सव में भारत की विविवधतापूर्ण संस्कृति लघु रूप में साकार हो रही है। 800 से अधिक शिल्पकार अपने-अपने राज्यों की हस्तकलाओं और उत्पादों का प्रदर्शन करने पणजी पहुंचे हैं। वहीं, 600 लोक कलाकार अपने-अपने राज्यों के लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां इस आयोजन में देंगे। राजस्थानी लोक कलाकारों की मांगणियार लोक गायन, कालबेलिया, भवाई नृत्य, बहुरूपिया एवं कठपुतली की प्रस्तुतियां लोकोत्सव का विशेष आकर्षण है।

गोवा के स्थानीय लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों के अलावा ओडिशा के कलाकारों की गोटीपुआ, असमिया कलाकारों के बिहू नृत्य, गुजरात के मेवासी नृत्य, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया छाऊ नृत्य, उत्तर प्रदेश के चरकुला, कर्नाटक के डोलू कुनिथा पारम्परिक नृत्य, महाराष्ट्र के लावणी, गुजरात के सिद्धि धमाल, हरियाणा के घूमर फाग, मणिपुर से आए कलाकारों के पुंग चोलम एवं ढोल चोलम नृत्य और थांग टा की प्रस्तुतियां इस महोत्सव में देखने को मिलेंगी।

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