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पद्मश्री से सम्मानित होंगी बैगा जनजातीय कलाकार जोधइया बाई

उमरिया, 27 जनवरी: मध्यप्रदेश के उमरिया जिले की जोधइया बाई बैगा को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कला के क्षेत्र में पद्मश्री पुरुस्कार देने की घोषणा की है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार जोधइया बाई बैगा को बीते वर्ष महिला दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रीय मातृशक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके बाद अब उन्हें इस सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है।

उमरिया के एक छोटे से गांव लोढ़ा की रहने वाली जोधइया बाई बैगा 83 वर्ष की उम्र में नई बुलंदियों को छूने जा रहीं हैं।

जोधइया बाई ने एक समय लगभग विलुप्त हो चुकी बैगा चित्रकारी को पुनर्जीवित किया है। बड़ादेव और बाघासुर के चित्रों से बैगाओं के घरों की दीवारें सुशोभित होती थीं, पर अब धीरे-धीरे इनका चलन खत्म सा होता दिख रहा था, लेकिन जोधइया बाई के प्रयास से बैगा जनजाति की यह कला एक बार फिर जीवंत हो उठी है। उन्होंने इसी तरह के चित्रों को कैनवास और ड्राइंग शीट पर आधुनिक रंगों से उकेरना शुरू किया। पिछले दस वर्षों से उनके द्वारा निर्मित चित्रों के विषय पुरानी भारतीय परंपरा में देवलोक, भगवान शिव और बाघ की अवधारणा पर आधारित हैं, जिसमें पर्यावरण और वन्य जीवन के महत्व को दर्शाया गया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जोधइया बाई बैगा के चित्रों को पेरिस और मिलान (इटली) में आयोजित कला दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा इंग्लैंड, अमेरिका और जापान आदि में पारंपरिक बैगा जाति के चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। उन्होंने शांतिनिकेतन विश्वभारती विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और आदिरंग के कार्यक्रम में भाग लिया।

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