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कब बोलना है और कब चुप रहना है: 5 स्थितियाँ जो कार्यस्थल पर आपके आत्मविश्वास को आकार देती हैं

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मौन हमेशा स्वर्णिम नहीं होता. यह जानने से कि कब सीमाएँ निर्धारित करनी हैं, मदद माँगनी है, या काम पर अपनी आवाज़ उठानी है, आत्मविश्वास बढ़ा सकती है, तनाव कम कर सकती है और आपके मूल्यों और कल्याण की रक्षा कर सकती है

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