उत्तर प्रदेश

विश्वविद्यालय विद्यार्थी और किसान हित में आपसी तालमेल से नवाचार बढ़ाए: आनंदीबेन पटेल

लखनऊ 26 दिसम्बर : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को यहाँ राजभवन से पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान, मथुरा द्वारा ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: कृषि विश्वविद्यालयों में कार्यान्वयन” विषय पर आयोजित भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ के 46वें वार्षिक कुलपति सम्मेलन को ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुपालन में आपसी तालमेल के साथ नवाचार बढ़ाने पर जोर देते हुए विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों और किसानों के लिए हितकारी विभिन्न बिन्दुओं पर प्रोजेक्ट, शोध तथा आवश्यक निर्णयों को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्रीमती पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की खाद्य टोकरी के रूप में विख्यात है और यहाँ कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी आदि क्षेत्रों में बहुत सी सम्भावनाएं हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को इन क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे देशों से तकनीक और शिक्षा के आदान-प्रदान से जुड़ने और प्रदेश के विद्यार्थियों को उच्च स्तर का विश्वस्तरीय ज्ञान और कौशल प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय स्तर से विद्यार्थियों और किसानों को जैविक खेती और मोटे अनाज के उत्पादन की जानकारी देने को कहा। उन्होंने कहा कि भूमि की सेहत और क्षमता को बचाना एक बड़ी चुनौती है, ऐसी स्थिति में हमें जैविक और गौ-आधारित खेती को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने मोटे अनाजों की विश्वस्तर पर बढ़ती मांग, इसके प्रयोग से स्वास्थगत फायदे और इसके उत्पादन में कम पानी की खपत की चर्चा करते हुए कहा कि इसकी खेती में यूरिया और दूसरे रसायनों की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए ये पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। इसी क्रम में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख भी किया।

उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में कृषि की बदलती आवश्यकताओं की चर्चा करते हुए शिक्षा पद्धति में नयी शिक्षा नीति के अनुसार प्रभावी बदलाव लाने को कहा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों में कृषि के साथ-साथ पशुपालन की शिक्षा भी दी जा रही है। इन परस्पर जुड़े उद्योगों को किसानों के मध्य भी प्रोत्साहित किया जाए, जिससे वे निरंतर आय का स्रोत प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को कृषि उद्योग को और आर्थिक प्रासंगिक बनाने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। ऐसे देश जिनके पास कृषि और पशुनस्ल सुधार की उच्च तकनीक है उन देशों में राजदूतों से सम्पर्क करके शिक्षण के परस्पर अदान-प्रदान, प्रोजेक्ट कार्य, समझौता ज्ञापन के माध्यम से जुड़कर शिक्षण के रोजगारपरक और विद्यार्थी तथा किसान हित में बहुउपयोगी बनाएं।

राज्यपाल ने कृषि में ड्रोन की उपयोगिता, जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत फसल की नई किस्मों के विकास और किसानों तक इनकी जानकारी पहुँचाने, भूजल संरक्षण के साथ-साथ हर जनपद में तालाबों और जल निकायों के संवर्द्धन और इसके महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कृषि की नवीनतक तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों और पशुपालन की नवीनतम जानकारी और प्रशिक्षण के अधिकतम प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण संचालित होने चाहिए जो किसानों और महिलाओं की आर्थिक उन्नति और रोजगार के साधन पैदा करे।

उन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों को नैक ग्रेडिंग में अग्रसर होने, सी.एस.ए कानपुर को देश का प्रथम नैक से ग्रेडिंग प्राप्त कृषि विश्वविद्यालय होने का दर्जा प्राप्त होने, प्रदेश में हो रही जी-20 देशों की बैठकों में विश्वविद्यालयों को विविध स्तरों पर प्रतिभागिता करने सम्बन्धी चर्चा भी की।

सम्मेलन में राजभवन के अधिकारी तथा मथुरा से ऑनलाइन जुड़े मथुरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल कुमार श्रीवास्तव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक डा. आर.सी. अग्रवाल, भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ के महासचिव डा. एन.पी. दक्षिणकर तथा एक्जीक्यूटिव सेक्रटरी डॉ. दिनेश कुमार, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा शिक्षाविद्, शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे थे।

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